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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 78, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

राज्ञेत्युक्ते रम्यमुक्तमिति संचिन्त्य सा तयोः । प्रकाशायाप्य धैर्याय ननाद च जहास च ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा के वैसा कहनेपर "राजा ने बहुत उत्तम कहा ।* - ऐसा मन में विचाकर वह उन लोगों के प्रकाश के लिए और अधेर्य के लिए गरजी और हँसी