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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 8, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 8, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

जीवन्मुक्तत्वमस्मिंस्तु श्रुते समनुभूयते । स्वयमेव यथा पीते नीरोगत्वं वरौषधे ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि इस शास्त्र के अतिशयमें हेतु क्या है, तो इस पर कहते हैं। जैसे उत्तम ओषधिके सेवन से निरोगिता स्वयं प्राप्त होती है, वैसे ही इस शास्त्रका श्रवण करनेपर जीवन्मुक्ति स्वयं अनुभूत होती है