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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

राक्षस्युवाच । अहो नु परमार्थोक्तिः पावनी तव मन्त्रिणः । राजा राजीवपत्राक्ष इदानीमेव भाषताम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

राक्षसी ने कहा : हे राजन्‌, आपके मन्त्री की परमार्थोक्ति अत्यन्त पवित्र है, यह कम आश्चर्यकी बात नहीं हे । अब कमल के समान विशाल नेत्रवाले ये राजा (आप) मेरे प्रश्नो का उत्तर कहें । भाव यह कि मन्त्री के वचनो में चमत्कार देखकर ही राजा भी तत्वज्ञ है, इस बात के ज्ञात होने पर भी राजा के कथन में अधिक चमत्कार होगा, यह समझकर राजा के वचनो को सुनने के लिए राक्षसी ने राजा से कहने का अनुरोध किया

सर्ग सन्दर्भ

अस्सीवाँ सर्ग समाप्त इक्यासीवाँ सर्ग राजा का क्रम से अवशिष्ट प्रश्नों का उत्तर देना तथा विशेषज्ञ होने के कारण कहींपर मन्त्री द्वारा कहे गये प्रश्नों में युक्ति-प्रदर्शन ।