Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 94
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 94 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 94
संस्कृत श्लोक
अन्तर्गतजगज्जालोऽप्येषोऽणुः साम्यमत्यजन् ।
स्थितोऽन्तस्थबृहद्वृक्षं बीजं भाण्डोदरे यथा ॥ ९४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बीज के अन्दर वृक्ष रहता है, वैसे ही यह जगत् किसके अन्दर स्थित है, इस प्रश्न का
उत्तर देते हैं।
जैसे बीज, जिसके अन्दर महान् वृक्ष है, पात्र के अन्दर रहता है, वैसे ही यह अणु, जिसके
अन्तर्गत अनेकों जगत् विद्यमान हैं, अपनी समता का त्याग न कर स्थित है। "बीजं भाण्डोदरे"
यह दृष्टान्त परमाणु के अन्तर्गत ब्रह्मचित् में भी सम्पूर्ण जगत् की उत्पादनशक्ति भरी हुई है,
यह सूचन के लिए है