Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 96
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 96 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 96
संस्कृत श्लोक
स शाखाफलपुष्पं स्वमजहद्बीजकोटरे ।
यथा तरुः स्थितस्तद्वद्विकासि चिदणोर्जगत् ॥ ९६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बीज के अन्दर
अपने शाखा, फल, फूल आदि का त्याग न करता हुआ वृक्ष स्थित है, वैसे ही चिदणु के अन्दर
यह विशाल जगत् स्थित है