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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । अस्मिन् जनपदे रक्षःकुलकाननमञ्जरि । जनस्य बाधतेऽत्यन्तं सदा हृदयशूलनम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा : हे राक्षसकुलकानन की मंजरी, इस नगर में हृदयशूल सदा प्राणियों को अत्यन्त पीडा पहुँचाता है