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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verses 41–42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verses 41–42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । हेमस्रग्दामवलिता दिनानि कतिचिद्गृहे । मम स्त्रीरूपिणी तिष्ठ यावदिच्छमनिन्दिते ॥ ४१ ॥ ततो दुष्कृतिनश्चौरान्वध्याञ्छतसहस्रशः । मण्डलेभ्यः समानीय ददे तुभ्यं सुभोजनम् ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा : हे अनिन्दिते, सोने के हारों से विभूषित स्त्रीका रूप धारण करनेवाली तुम मेरे घरमे जब तक तुम्हारी इच्छा हो, कुछ दिनों तक रहो