Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 58

संस्कृत श्लोक

पञ्चभिर्वा चतुर्भिर्वा वर्षैः सा संप्रबुध्यते । तत्ततो मण्डलं याति तेन राजसभाजने ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

वह पाँच या चार वर्षो में समाधि से जागृत होती थी ओर तदनन्तर समाधि से उठने के बाद फिर राजा के पूर्वोक्त वचन से प्रतिसंगम की इच्छा होने पर राजा के पास जाती थी