Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
तत्र विश्रम्भगर्भाभिः कथाभिः कंचिदेव सा ।
स्थित्वा कालं गृहीत्वा तान्वध्यान्स्वास्पदमेत्यथ ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ परस्पर विश्वासपूर्ण
कथाएँ करती हुई कुछ काल तक रहकर उन वध्योंको लेकर फिर अपने स्थान हिमालय को
जाती