Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 87, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
जक्षुस्तान्देहकांस्तत्र क्रव्यादा वनवासिनः ।
इतश्चेतश्च लुठितान्सुफलानीव मर्कटाः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वन में रहनेवाले मांसभक्षी पशु-पक्षियोंने, जैसे बन्दर सुन्दर फलों को खाते हैं
वैसे ही, इधर उधर लुढके हुए उनके शरीरो को खा डाला