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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 94, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

निर्झरादमलोद्योतात्पयसामिव बिन्दवः । अजस्यैवाखिला राम भूतसंततिकल्पनाः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार अंशांशिभाव की कल्पना द्वारा ब्रह्म से जीवों की अभेदयोग्य दिखला कर उपाधिकी असत्यता के प्रदर्शन द्वारा अभेद दिखलाते हैं। हे श्रीरामजी, जैसे घटाकाश, बटलोई का (पतीली का) आकाश, छिद्राकाश आदि आकाश की ही रचनाएँ हैं वसे ही अजन्मा परब्रह्म की ही सम्पूर्ण प्राणिवर्गरूप में कल्पना हुई है