Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 94, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
आकाशस्य घटस्थालीरन्ध्राकाशादयो यथा ।
सर्वा एवोत्थिता लोककलना ब्रह्मणः पदात् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल के सीकर (छोटे छोटे जलबिन्दु), जलभौंरियाँ, लहरें और बड़े जलबिन्दु जलसे ही
उत्पन्न होते हैं वैसे ही ये सम्पूर्ण लोकरचनाएँ परमपद ब्रह्म से ही उदित हुई हैं