Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 95, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
एवं स्थिते कथं नाम जन्मबीजेन कर्मणा ।
विनोत्पत्तिस्त्वया प्रोक्ता भूतानां ब्रह्मणः पदात् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार भूमि का रचकर कर्ता और कर्म की साथ साथ उत्पत्ति होती है, इस पक्षपर
आक्षेप करते हैं।
ऐसी अवस्था में जन्म के निमित्तभूत कर्म के बिना परमपदरूप ब्रह्म से प्राणियों की उत्पत्ति
आपने कैसे कही ?