Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 98, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 98, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 98 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अस्ति रामाटवी स्फारा शून्याशान्तातिभीषणा ।
योजनानां शतं यस्यां लक्ष्यते कणमात्रकम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मृग, पक्षी आदिसे रहित, बड़े-बड़े विक्षेपों से परिपूर्ण,
अतिभयंकर बड़ी विशाल एक अटवी (& ) है, वह इतनी विशाल है कि उसमें सैंकड़ों योजन
भूमि परमाणु की भाँति अतिसूक्ष्म प्रतीत होती है