Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 1, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
साकारवटधानादावङ्कुराः सन्ति युक्तिमत् ।
नाकारे तन्महाकारं जगदस्तीत्ययुक्तिकम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
में अंकुर है, यह बात तो युक्ति-युक्त हे, लेकिन आकार रहित परमात्मा में यह विशालकाय जगत हे,
यह कहना तो अनहोनी हे