Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
दीर्घकन्धरया नूनमुन्नतीकृतवक्त्रया ।
प्रेक्षमाणमिव प्राणानुत्क्रान्तानम्बरोदरे ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वह कंकाल ऊँची गर्दन से, जिसने उसके मुँह को ऊँचा किया था,
मानों आकाश में उठे हुए प्राणपखेरुओं को देख रहा था