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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

मृणालिकापाण्डुरया धारावभृतमांसया । नासाग्रास्थिकया वक्त्रे कृतसीमाकृतिं दधत् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह कमल की जड के तुल्य सफेद नासिका के अग्रभाग की छोटी हड्डी से, जिसका कि वृष्टि धाराओं से मांस गिर गया था, मुँह मेँ सीमा जानने के लिए गाड़ हुए पत्थर आदि के आकार को धारण करता था