Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ऋज्व्या संशुष्कशिरया स्वास्थिमात्रावशेषया ।
ग्रीवयात्मानुसृतया दीर्घीकुर्वदिवाकृतिम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सीधी गर्दन से, जिसकी नसे सूख गई थी, एक
मात्र हद्ै शेष रह गई थी एवं जो वासना से व्याप्त आत्मा का अनुसरण सा कर रही थी, अपने आकार
को ऊँचा कर रहा था