Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
उदरेणातिरिक्तेन चर्मशेषेण शोषिणा ।
प्रदर्शयदिवाज्ञस्य हृदयस्यातिशून्यताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त रिक्त, सूखे हुए एवं चमड़ा ही जिसमें शेष है, ऐसे उदर से अज्ञानी के हृदय की शून्यता को
मानों वह दर्शा रहा था