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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

प्रेक्ष्य तच्छुष्ककङ्कालमालानं दुःखदन्तिनः । पूर्वापरपरामर्शमकुर्वन्भृगुरुत्थितः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने दुःखरूपी हाथी के बन्धनस्तम्भ के तुल्य उस सूखे हुए कंकाल को देखकर पूर्वापर का विचार न करते हुए भृगु उठ खड़े हुए