Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आलोकसमकाले हि प्रतिभानं ततो भृगोः ।
चिरमुत्क्रान्तजीवः किं मत्पुत्रोऽयमिति क्षणात् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पुत्र के कंकाल को देखते ही
भृगु के मन में तुरन्त यह वितर्कं उत्पन्न हुआ किं क्या मेरे लड़के के प्राण पखेरू चिरकाल से उड गये
हैं