Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अकाल एव मत्पुत्रो नीतः किमिति कोपितः ।
कालाय शापमुत्सष्टुं भगवानुपचक्रमे ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे क्रूर काल, अकाल में ही तुमने मेरे पुत्र को क्यों मारा ? यों कुपित हुए भगवान भृगु काल को शाप
देने के लिए तैयार हुए