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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

अथाकलितरूपोऽसौ कालः कवलितप्रजः । आधिभौतिकमास्थाय वपुर्मुनिमुपाययौ ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

मुनिजी के शाप देने के लिए उद्यत होने पर लोगों को कवलित करनेवाला रूपरहित भी यह काल आधिभौतिक शरीर धारण कर मुनिजी के पास आया