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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

ननु विज्ञातसंसारगतयो वयमापदाम् । संपदां चैव गच्छामो हर्षामर्षवशं विभो ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे विभो, यद्यपि हम लोग संसार की गति को भलीभाँति जान चुके हैं तथापि भगवदिच्छावश हम आपत्तियों ओर सम्पत्तियां के हर्ष और क्रोध के वशीभूत होते हैँ