Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अयुक्तकारिणि क्रोधः प्रसादो युक्तकारिणि ।
कर्तव्य इति रूढेयं संसारे भगवन् स्थितिः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, अपकार या अनुचित
कार्य करनेवाले व्याक्ति पर क्रोध करना चाहिए और उचित कर्मकारी पर प्रसन्नता प्रगट करनी चाहिए,
इस प्रकार का नियम संसार में चिरकाल से चला आ रहा है, इसलिए मैंने आपके प्रति क्रोध किया
है