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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

इदं कार्यमिदं नेति यावत्कार्यं जगद्भ्रमः । तस्यैतत्संपरित्यागो हेय एव जगद्गुरो ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जब तक यह अवश्य करना चाहिए, यह नहीं करना चाहिए यों इष्ट ओर अनिष्ट साधनों का फल सत्य है, ऐसी प्रतीति रहती है तभी तक जगत की भ्रान्त है, हे जगत्गुरो, इस समय उस भ्रान्तिका तत्त्वज्ञान से त्याग हो चुका है, इसलिए क्रोध ओर प्रसन्नता करना चाहिये, यह नियम भी हेय हो गये हे । इस समय आप पर क्रोध करना अनुचित ही हे