Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
विस्मयस्मेरया दृष्ट्या कालमालोक्य कान्तया ।
वीतरागमुवाचेदं वीतरागो मुनिर्वचः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
आश्चर्य से विकसित सुन्दर दृष्टि से राग-द्वेषशून्य काल को देखकर
पुत्र के प्रति रागरहित हुए मुनि भूगुजी ने यह वचन कहा