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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सर्वेषामेव देहानां सुखदुःखार्थभाजनम् । शरीरं मन एवेह नतु मांसमयं मुने ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

मुनिजी, देहात्मता को प्राप्त हुए (देह में आत्मबुद्धि करनेवाले) सभी जीवों का सुख-दुःख आदि का भाजन मनोरूप शरीर ही है, मांसमय शरीर उक्त सुख-दुःखआदि का भाजन नहीं है