Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 17, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 17, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
प्रथमोऽयं स्वसंकल्पः प्रथामभ्यागतो यथा ।
तथातिपरमार्थेन दृष्टेनेत्थं विभाव्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपना प्राथमिक संकल्प ही जगदाकार प्रतीति को प्राप्त हआ, यह कैसे जाना जा सकता है ? इस
पर कहते हैं।
प्रथम संकल्प ही जगदाकार प्रतीति को प्राप्त हुआ है, यह अत्यन्त परमार्थदृष्टि से ही ज्ञात होता
है