Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

बीजस्याकृतिमत्सर्वं तेनानाकृतिमत्पदम् । न युज्यते समीकर्तुं तस्मान्नास्त्युपमा शिवे ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

बीज की अपेक्षा ब्रह्म में और भी भेद दर्शाते हुए निर्विशेष ब्रह्म की बीज से जो समता दिखाई गई है, वह गौणी वृत्ति से है। वस्तुतः ब्रह्म और बीज की तुलना नहीं है ऐसा कहते हैं। बीज के अवयव, गुण आदि सभी स्वरूप आकारयुक्त अहं यानी अन्य से व्यावृत्ति करनेवाले जाति, विशेष प्रकार की गठन आदि से युक्त हैँ । इसलिए आकृतिरहित परमपदरूप ब्रह्म की बीज से तुलना नहीं की जा सकती । वस्तुतः कल्याणरूप ब्रह्म में कोई उपमा है ही नहीं