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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

यदाम्भसा प्लाव्यतेऽसौ तदा वार्यादिसंभ्रमम् । अन्तरेवानुभवति स्वामोदं कुसुमं यथा ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे फूल अपनी सुगन्धि का अपने अन्दर ही अनुभव करता हे वैसे ही जब-जब नाडी के अन्दर स्थित श्लेष्मा के जल से प्लावित होता है तब अपने अन्दर ही जलआदि के भ्रम को देखता है