Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 2, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अत्यन्ताभाव एवास्य भावैर्यदुपशाम्यति ।
न शाम्यत्येव सच्चित्ते क्व शाम्यत्येव दृश्यता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जब दृश्य काम, कर्म, वासना आदि बीजों के साथ नष्ट
हो जाता हे तब इस जगत का आत्यन्तिक उच्छेद होता हे । चित्त यदि रहे तो काम आदि भावनाओं का
उच्छेद न हो सकने के कारण दृश्य शान्त होता ही नहीं, इसलिए ज्ञान के बिना दृश्यता कहाँ शान्त हो
सकती है ? अर्थात् दृश्य की शान्ति दुर्लभ ही हे ।