Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 2, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अथ पृथ्व्यादयोऽन्ये वा केचिदत्रोपकुर्वते । सहकारिकारणत्वं तत्पूर्वं चात्र दूषणम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे, प्रलय में सम्पूर्ण जगत की सत्ता का स्वीकार करने से सहकारी कारणों की दुर्लभता नहीं है, क्योकि जगत के अन्तर्गत परथिवी आदि से परस्पर का उपकार हो सकता है, इस शंका का खण्डन करते हैं। यदि पृथिवी आदि अथवा अन्य कोई जगत की उत्पत्ति मेँ उपकार करते है तो पृथिवी आदि की सहकारिकारणता पृथिवी आदि की उत्पत्ति के बाद होगी, ऐसी अवस्था में पृथिवी आदि की उत्पत्ति की सिद्धि होने पर उनकी सहकारिता की सिद्धि होगी और सहकारिता की सिद्धि होने पर उत्पत्ति की सिद्धि होगी, इस प्रकार अन्योन्याश्रय दोष यहाँ पर उपस्थित है