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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

शृणु दर्शनभेदेन तन्नामाभिमताकृतिम् । वाग्मिनां वदतां यातं चित्राभिः शास्त्रदृष्टिभिः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

बहुत से वादी अपने-अपने अभिमत नाम-रूप और आकार से उसी की अन्य-अन्यरूप से कल्पना करते हैं, इस आशय से कहते हैं। वक्‍ताओं में श्रेष्ठ वादियों की भाँति-भाँति की शास्त्रदृष्टियों से वही उनके अभिमत आकृति को दर्शन भेद से प्राप्त हुआ है, इसे आप सुनिये