Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यं यं भावमुपादत्ते मनो मननचञ्चलम् ।
तत्तामेति घनामोदमन्तःस्थः पवनो यथा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि एक ही मूल है, तो वादियों के सिद्धान्तभेद कैसे हुऐ ? इस शंका के समाधान के बहाने वही
कर्म है, ऐसा मुमुश्षुओं ने निर्णय किया है” ऐसा जो पहले कहा था, उसीकी व्याख्या करते हैं।
मनन से चंचल हुआ मन जिस जिस भावना से उत्पन्न हुए भाव को प्राप्त होता है, जैसे सुगन्ध,
दुर्गन्ध, उत्कट गन्धवाले फूलों के भीतर स्थित वायु सुगन्ध, दुर्गन्ध और उत्कट गन्ध को प्राप्त हो जाता
है वैसे ही उक्त मन भी तत्स्वरूपता को प्राप्त होता है