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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verses 3–5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verses 3–5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 3- 5

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । दामव्यालकटन्यायो मा ते भूदित्युदाहृतम् । ब्रह्मन् किमेतद्भवता भवतापापहारिणा ॥ ३ ॥ भीमभासदृढस्थित्या त्वं विशोको भवेति च । प्रभो किमुक्तं भवता भवतापापहारिणा ॥ ४ ॥ उदारयैतया शुद्धं संप्रबोधय मां गिरा । घनस्तापापहारिण्या प्रावृषीव कलापिनम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

भवताप को दूर करनेवाली अपनी उदार वाणी से शुद्ध तत्त्व का बोध मुझे कराइये