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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

अन्योन्यं पूरयामासुः शस्त्रपूरैर्दिशो दश । वनानि कुसुमव्रातैः सुमेराविव मारुतः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे वायु सुमेरु पर्वत पर फूलों के समूहों से वनों को भर देता है वैसे ही परस्पर के प्रति फेंके गये शस्त्र समूहों से उन लोगों ने दशो दिशाएँ भर दी