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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 3, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

बुद्धं प्रतीदं ब्रह्मैव केवलं शान्तमव्ययम् । अबुद्धं प्रति बुद्ध्यैतद्भासुरं भुवनान्वितम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी सिद्धान्त को स्पष्ट करके दिखलाते हैं। यह जगत्‌ ज्ञानी के प्रति केवल, शान्त, अविनाशी ब्रह्म ही है ओर अज्ञो के प्रति बुद्धिमात्र से भासमान नाना लोकों से युक्त है