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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

यमस्य किङ्करा यत्र ये कालत्रासनक्षमाः । कुतूहलेन तिष्ठन्ति नरकार्णवपालकाः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

वहाँ पर भी क्या उन्हे शम्बर का भय नहीं था ? इस शंका को दूर करने के लिए कहते हैँ । जहाँ पर नरकरूपी समुद्र की रक्षा करनेवाले यमराज के सेवक स्वेच्छा से रहते थे । वे काल की तरह औरों को भयभीत करने में समर्थ थे, अतएव वहाँ पर शम्बर का भय न था, यह भाव है