Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
ते तेषामथ यातानां दत्त्वा भयमभीरवः ।
चिन्ता इव घनाकाराः कुमारीश्च ददुः क्रमात् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर भयरहित यमराज के सेवकों ने शरण मेँ आये हुए उन तीनों को अभय देकर मूर्तिमती चिन्ताओं
की तरह क्रम से तीन कन्याएँ दी