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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

नच तत्क्वचिदासुप्तं न प्रबुद्धं कदाचन । चिद्व्योम केवलं दृश्यं जगदित्यवगम्यताम् ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

ये तो दूसरे को समझाने के लिऐ दो अवस्था सादृश्य की कल्पना से कही गई है, वास्तविक जो स्थिति है, उसे तो अब कहते है। वह चिदाकाशन तो कभी सोया है ओर न कभी जागा है, चिदाकाश ही दृश्य जगत है, ऐसा आप निश्चय जानिये