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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

चिच्चमत्कुरुते चारु चञ्चलाऽचञ्चलात्मनि । यत्तयैव तदेवेदं जगदित्यवबुध्यते ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि यह जगत उत्पन्न नहीं हुआ तो जगत नाम से सबको इसका बोध कैसे होता है ? इस पर कहते हैं। निश्चल आत्मा में कल्पित चंचलता से चंचल, माया में प्रतिबिम्बित तन्मय जगत की जो सुन्दर कल्पना करता है, उसीको वही जगतरूप से जानता है