Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
ते दैत्या भुवनं प्राप्य च्छादयामासुरम्बरम् ।
गर्जन्तो हेतितडितः प्रावृषीव पयोधराः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
गरज रहे ओर अस्त्र रूपी बिजली से युक्त उन दैत्यो ने
ऊपर के लोकों में आकर वर्षा ऋतु के मेघो की तरह आकाश को ढक दिया