Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अयुध्यन्त समं देवैरपि वर्षगणान्बहून् ।
विवेकवशतो जग्मुर्नाहंकारं कदाचन ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
बहुत वर्षो तक
देवताओं के साथ उन्होने युद्ध किया फिर भी विवेकवश वे कभी अहंकार को प्राप्त नहीं हुए