Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verses 5–6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verses 5–6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 5, 6
संस्कृत श्लोक
इदानीं संसृजाम्यन्यान्दानवान्माययोदितान् ।
तानप्यध्यात्मशास्त्रज्ञान्सविवेकान्करोम्यहम् ॥ ५ ॥
ततस्तत्त्वपरिज्ञानान्मिथ्याभावनयोज्झिताः ।
नाहंकारं प्रयास्यन्ति विजेष्यन्ति च तान्सुरान् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
अब मैं माया से रचे हुए अन्य
दानवो की सृष्टि करता हूँ और उन्हें अध्यात्मशारत्र के ज्ञाता ओर विवेकशील बनाता हू । तत्त्वज्ञानी
होने के कारण मिथ्याभावना से रहित वे अहंकार को प्राप्त नहीं होगें और उन देवताओं पर विजय प्राप्त
करेंगे