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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

आत्मैवेदं जगदिति विना भावेन दुःखदा । दृश्यश्रीरन्यथा त्वेषा भोगमोक्षप्रदायिनी ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

यह जगत आत्मा ही है, इस प्रकार के बोध के बिना यह दृश्य शोभा दुःखदायिनी है । उक्त बोध होने पर तो यह भोग-मोक्ष देनेवाली हे