Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 37, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 37, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
नेतरा जानासि राम त्वमियं ब्रह्मसंस्थितिः ।
सर्वद्वन्द्वविनिर्मुक्तः कर्ता भव गतज्वरः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी,
पूर्वोक्त प्रकारों से अन्य साफल्य आदि की कल्पना हे ही नहीं । यही ब्रह्म संस्थिति है। यदि इसमें आप
अन्य कल्पना को जानते हैं, तो सब द्वन्द्वों से रहित और सब सन्तापं से शून्य होते हुए भी आप कर्ता
(संसारी) बनिये, मैं आपको रोकता नहीं हूँ, यह भाव है