Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 4, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 4, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
शास्त्रसत्संगमाभ्यासात्सविवेको जितेन्द्रियः ।
अत्यन्ताभावमेतस्य दृश्यस्याप्यवगच्छति ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रियों पर विजय पाने के लिए विवेक श्रेष्ठ उपाय है । विवेक की प्राप्ति में एकमात्र सज्जन और
शास्त्रों में निष्ठा रखना उत्तम उपाय है, इस आशय से कहते हैं।
बार-बार शारत्रपर्यालोचन और सत्संगति करने से विवेकशील और जितेन्द्रिय हुआ पुरुष इस
दृश्य का अत्यन्त अभाव जानता है