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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

केचिद्विशालाः ककुभः केचिन्नद्यो महारयाः । केचित्स्त्रियः कान्तदृशः केचित्पण्डनपुंसकाः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

कोई विशाल दिकृपाल देवता हैं, तो कोई महावेगवाली नदियाँ हैं । कोई मनोहर नेत्रवाली स्त्रियाँ हैं, तो कोई नपुंसक हैं