Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
अभिमानगजालानं मानसाम्भोजशोभितम् ।
अथालोच्य वपुर्ब्रह्मा कान्तमात्मीयमुत्तमम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर
त्रिकालदर्शी भगवान ब्रह्मा ने अपने उत्तम ओर मनोहर रूप को देखकर विचार किया